Success Story पटवारी से IPS अफसर तक का संघर्ष भरा सफर, 6 साल में हासिल की 12 सरकारी जॉब

Success Story पटवारी से IPS अफसर तक का संघर्ष भरा सफर, 6 साल में हासिल की 12 सरकारी जॉब

Success Story पटवारी से IPS अफसर तक का संघर्ष भरा सफर, 6 साल में हासिल की 12 सरकारी जॉब

सक्‍सेस स्‍टोरी की सीरीज में अब तक हम कई ऐसे शानदार व्यक्तित्व के बारे में चर्चा कर चुके हैं, जिन्होंने कड़ी संघर्ष के बाद सफलता हासिल की। इस कड़ी में आज हम आपको एक ऐसी शख्सियत के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनकी सफलता का सफर काफी संघर्ष भरा और दिलचस्प रहा। हम बात कर रहे हैं आईपीएस ऑफिसर प्रेमसुख डेलू की। इन्‍होंने 6 साल में 12 परीक्षाएं पास कर सरकारी जॉब हासिल की और आखिरकार आईपीएस अफसर बनें।

अक्सर लोग अपने जीवन में एक लक्ष्य निर्धारित करते है, उस लक्ष्‍य का छोटा हिस्‍सा पूरा होने के बाद वो अपना प्रयास छोड़ देते है। लेकिन प्रेमसुख डेलू ने जीवन में एक के बाद एक लक्ष्य निर्धारित किए और कड़ी मेहनत और लग्न के साथ उन्हें हासिल करते गए। जब तक वे सफलता के शीर्ष पर नहीं पहुंच गए, तब तक वे रूके नहीं।

किसान परिवार से आते हैं प्रेमसुख

आईपीएस प्रेमसुख डेलू मूलरूप से बीकानेर जिले की नोखा तहसील के गांव रासीसर के रहने वाले हैं। इनका जन्म 3 अप्रैल 1988 को हुआ था। उनके पिताजी खेती किसानी करते हैं। 4 भाई-बहनों में प्रेमसुख सबसे छोटे हैं। उनके परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी। इनके पिता ऊंटगाड़ी चला कर लोगों का सामान एक जगह से दूसरी जगह ले जाने का काम करते थे। प्रेम बचपन से ही सरकारी ऑफिसर बनकर अपने परिवार को गरीबी से बाहर निकालने के बारे में सोचते हैं। इसके लिए उनका पूरा ध्यान सिर्फ पढ़ाई पर ही रहा। प्रेमसुख डेलू ने 10वीं तक की पढ़ाई अपने ही गांव के सरकारी स्कूल से की। इसके बाद आगे की पढ़ाई उन्होंने बीकानेर के राजकीय डूंगर कॉलेज से पूरी की। यहां से उन्होंने इतिहास में एमए किया और गोल्ड मेडलिस्ट रहे। इसके साथ ही उन्होंने इतिहास में यूजीसी-नेट और जेआरएफ की परीक्षा भी पास कर ली।

ग्रेजुएशन के बाद ही बन गए थे पटवारी

प्रेमसुख डेलू के बड़े भाई राजस्थान पुलिस में कॉन्स्टेबल हैं। उन्होंने ही प्रेम को प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए प्रेरित किया था। प्रेमसुख साल 2010 में ग्रेजुएशन पूरा करने के बाद पहली बार प्रतियोगी परीक्षा में बैठे। उन्होंने पटवारी की भर्ती के लिए आवेदन किया और उसमें सफल हो गए। हालांकि इसके बाद वह समझ चुके थे कि उनकी क्षमता इससे कहीं ज्यादा है। पटवारी की नौकरी करते हुए ही उन्होंने मास्टर्स की डिग्री भी प्राप्त कर ली और नेट भी पास कर लिया।

लगातार क्रैक करते रहे एग्‍जाम

पढ़ाई पूरी होने के बाद प्रेमसुख डेलू ने राजस्थान ग्राम सेवक परीक्षा दी, जिसमें उन्‍होंने दूसरी रैंक हासिल की। इसके बाद वे असिस्टेंट जेलर की परीक्षा में बैठे और उसमें पूरे राजस्थान में पहले नंबर पर रहे। जेलर के पोस्ट पर ज्वाइन करने से पहले ही सब-इंस्पेक्टर की परीक्षा का परिणाम भी आ गया और उसमें भी उनका सिलेक्शन हो गया। इतनी परीक्षाएं पास करने के बाद आम इंसान आत्मसंतुष्ट हो जाता है और वो जॉब करके सेटल होने की कोशिश करता है। हालांकि इसके बाद भी प्रेमसुख नहीं रुके और बीएड परीक्षा पास करने के साथ नेट भी क्लियर किया। इसके बाद उन्हें कॉलेज में लेक्चरर का पद मिल गया। इस दौराना उन्‍होंने सिविल सर्विसेज परीक्षा देने का फैसला किया।

प्रेमसुख अपने दूसरे प्रयास में बने आईपीएस

कॉलेज में लेक्चरर की पोस्‍ट पर कार्य करते हुए उन्‍होंने अपनी तैयारी जारी रखी। उन्‍होंने राजस्थान प्रशासनिक सेवा की परीक्षा दी, जहां पर उनका तहसीलदार के पद पर चयन हो गया और प्रेमसुख ने तहसीलदार का पद ज्वाइन कर लिया। यहां से उन्‍होंने यूपीएससी परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी। जॉब के बाद बचे हुए समय में प्रेम अपना पूरा ध्‍यान पढ़ाई में लगाते थे। साल 2014 में वे पहली बार यूपीएससी परीक्षा में बैठे, लेकिन उनहें सफलता नहीं मिली। जिसके बाद वे फिर से 2015 में इस परीक्षा में बैठे। अपने दूसरे प्रयास में उन्‍होंने यूपीएससी की परीक्षा क्रैक कर ली। उनको ऑल इंडिया में 170वां रैंक के साथ आईपीएस की पोस्‍ट मिली। उन्हें गुजरात कैडर मिला और उनकी पहली पोस्टिंग गुजरात के अमरेली में एसीपी के पद पर हुई।

हर नौकरी से कुछ न कुछ जरूर सीखा

एक इंटरव्‍यू में प्रेमसुख डेलू ने कहा कि, उन्हें हर एक नौकरी से कुछ ना कुछ सीखने को मिला। असिस्टेंट जेलर और सब इंस्पेक्टर बनने के बाद उन्हें पुलिस के कर्मचारियों की परेशानियां जानने का मौका मिला। रेवेन्यू विभाग में कार्य के दौरान जमीन और संपत्ति से संबंधित मामलों को सुलझाने में उन्हें मदद मिली। यूपीएससी परीक्षा में इन सब की जानकारी और अपनी पढ़ाई की बदौलत आईपीएस ऑफिसर बन सकें। प्रेमसुख ने कहा कि वे छोटे लक्ष्‍य निर्धारित करते थे, जब उसमें सफल होते तो लक्ष्‍य भी बड़ा हो जाता। आखिरकार वे अपने सपने को पूरा करने में सफल रहे।

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