बिजली बोर्ड से 1500 आउटसोर्स कर्मचारियों को निकालने की तैयारी
हिमाचल प्रदेश बिजली बोर्ड से 1500 आउटसोर्स कर्मचारियों को निकालने की तैयारी
राज्य बिजली बोर्ड से करीब 1500 आउटसोर्स कर्मियों को निकालने की तैयारी शुरू हो गई है। नवनियुक्त 1552 जूनियर टीमेट और जूनियर हेल्परों के पद संभालते ही आउटसोर्स पर लगी मेंटेनेंस गैंग की छुट्टी करने का फैसला लिया है।
वहीं बोर्ड प्रबंधन के इस फैसले का विरोध होना भी शुरू हो गया है। मजदूर संगठन सीटू इन कर्मचारियों की बहाली के लिए 17 मार्च को विधानसभा घेराव करेगा। बीते करीब सात-आठ वर्षों से बिजली बोर्ड ने स्टाफ की कमी के चलते ठेकेदारों के माध्यम से आउटसोर्स पर कई कर्मचारी नियुक्त किए हैं।
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बीते दो-तीन वर्षों से इनकी सेवाएं बंद करने की तैयारी की जा रही थी, लेकिन बोर्ड में नई भर्तियां न होने से इन कर्मियों को सेवा विस्तार दिया जाता रहा। अब प्रबंधन की ओर से जारी पत्र में स्पष्ट किया गया है कि जूनियर टीमेट और जूनियर हेल्परों के पद संभालते ही मेंटेनेंस गैंग की सेवाएं समाप्त की जाएं।
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उधर, बोर्ड प्रबंधन का कहना है कि आउटसोर्स पर नियुक्त कर्मियों की रिक्त चल रहे क्षेत्रों में सेवाएं ली जा सकती हैं। वहीं, सीटू के प्रदेश अध्यक्ष विजेंद्र मेहरा और महासचिव प्रेम गौतम ने कहा है कि सरकार व बिजली बोर्ड प्रबंधन की ओर से मात्र एक आदेश जारी करके 1500 आउटसोर्स कर्मियों को नौकरी से बाहर करना चिंता का विषय है।
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पिछले कुछ वर्षों में छह मेंटेनेंस गैंग कर्मचारियों को बिजली बोर्ड में सेवाएं देते वक्त हादसे का शिकार होना पड़ा है। आज इन्हें नौकरी से निकाला जाना गलत है। भविष्य में बिलिंग कर्मियों व बिजली बोर्ड कार्यालयों में काम कर रहे अन्य सैकड़ों आउटसोर्स कर्मियों पर यह हमला होना तय है।
आठ वर्षों से सेवाएं देने को निकालना न्यायसंगत नहीं
हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड तकनीकी कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष दुनी चंद ठाकुर व प्रदेश महामंत्री नेकराम ठाकुर ने भी बोर्ड के फैसले का विरोध किया है। उन्होंने कहा कि जो 1552 कर्मचारी अभी भर्ती किए हैं, वे तो मात्र दो वर्ष के अंदर जितने तकनीकी कर्मचारी सेवानिवृत्त हुए हैं, उनकी भरपाई भी नहीं कर सकेंगे।
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ऐसे में बोर्ड प्रबंधन का यह तुगलकी फरमान समझ से परे है। ये कर्मचारी पिछले सात-आठ वर्षों से सेवाएं दे रहे हैं। इन्हें निकालना न्यायसंगत नहीं है। संघ ने मुख्यमंत्री और ऊर्जा मंत्री से इन आदेशों को तुरंत निरस्त करने की मांग की है।
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